छात्रों-युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति का ज़िम्मेदार कौन है?
पूरे देश में छात्रों-युवाओं में बढ़ती आत्महत्याएँ विकराल रूप लेती जा रही है। छात्रों का हब कहे जाने वाले शहर अब आत्महत्याओं के हब बन गये है। भविष्य की अनिश्चितता से हताश, निराश छात्र आज ज़िन्दगी के बजाय मौत को चुनने के लिये मजबूर हैं। ये वे हत्याएँ हैं जिनका न कोई सुराग़ है, न ही सुनवाई।













