मतदान के जनवादी अधिकार पर फ़ासीवादी हमले का नया दौर
भाजपा और चुनाव आयोग द्वारा की जा रही ‘वोटचोरी’ के ख़िलाफ़ और जनता के जनवादी अधिकार की रक्षा के लिए राहुल गाँधी और तमाम विपक्षी दल जो सीमित संघर्ष कर रहे हैं, उसका समर्थन करते हुए भी इस मसले को पूरी तरह इन पूँजीवादी चुनावबाज़ पार्टियों के हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता है। सबसे बुनियादी जनवादी अधिकार पर हो रहे फ़ासीवादी हमले के ख़िलाफ़ आज क्रान्तिकारी शक्तियों को व्यापक तौर पर जनता को संगठित करना होगा। यही हमारे सामने एकमात्र विकल्प है।













