क्रान्तिकारी छात्र राजनीति से घबराये हुक़्मरान
अगर छात्रसंघ को ख़त्म किया जाता है तो यह एक फ़ासिस्ट और अलोकतांत्रिक कदम होगा। छात्र कहीं भी आवाज़ उठाएँगे तो उन्हें कुचला जाएगा और चुनावबाज पार्टियों के लग्गुओं-भग्गुओं का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, मगर कैम्पसों में एक मुर्दा शान्ति छा जाएगी। छात्रसंघ की गन्दी राजनीति का इलाज छात्रसंघ को ख़त्म करके करना वैसा ही है जैसे कि बीमार की बीमारी का इलाज करने की बजाय बीमार को ही ख़त्म कर दिया जाय। कोशिश यह होनी चाहिए कि कैम्पस में मौजूद क्रान्तिकारी ताकतें आगे बढ़कर छात्रसंघ की कमान अपने हाथ में ले लें।










