सी.बी.सी.एस. : “च्वाइस” के ड्रामे के बहाने विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में पधारने का न्यौता
शिक्षा व्यवस्था में यह बदलाव होना कोई नयी बात नहीं है। जहाँ तमाम क्षेत्रों में निजी पूँजी को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं शिक्षा भी इससे अछूती नहीं रही है। चाहे 2008 में लागू हुई सेमेस्टर प्रणाली की बात कर लें या चार वर्षीय पाठ्यक्रम की बात कर लें या अभी सीबीसीएस का मुद्दा हो, उच्चतर शिक्षा में लाये जा रहे इन बदलावों के कुछ ठोस कारण हैं जो मौजूदा आर्थिक-राजनीतिक ढाँचे के साथ जुड़े हुए हैं। जब तक हम शिक्षा में हो रहे इन बदलावों को इस व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखेंगे तब तक परदे के पीछे की सच्चाई को हम नहीं जान पाएँगे।














