भारत में हिन्दुत्ववादी फ़ासीवाद की चुनौती और छात्रों-युवाओं के कार्यभार
छात्रों-युवाओं के ऊपर भी फ़ासीवादी शासन के इन ग्यारह सालों में भयंकर कहर बरपा हुआ है। जेएनयू से लेकर जामिया, अलीगढ़, बीएचयू, हैदराबाद, एफ़टीआईआई समेत देश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों ने इन दस सालों में फ़ासीवादी हमले का दंश झेला है। छात्रसंघ जैसी संस्थाओं को भंग करने, जनता के पक्ष में होने वाले छात्रों-युवाओं के हर आन्दोलन का बर्बर दमन करने और फ़र्ज़ी मुक़दमे लाद कर जेल में डाल देने का मॉडल लागू करके छात्र-युवा आन्दोलन की कमर तोड़ने और शैक्षणिक संस्थाओं को फ़ासीवाद की प्रयोगशाला बना देने के जो प्रयास मोदी सरकार के सत्ता में आने के साथ ही शुरु हो गये थे, वह हर दिन नये मुक़ाम पर पहुँच रहे हैं। नयी शिक्षा नीति को लागू करने के साथ ही शिक्षा के पूरे ढाँचे के फ़ासीवादीकरण की योजनाबद्ध ढंग से शुरुआत की जा चुकी है।















