बिपिन चन्द्र की पुस्तक पर भगवा हमला : भगतसिंह बनाम क्रान्तिकारी आतंकवाद
एक तरफ़ जहाँ संघ तृणमूल स्तर पर अपने प्रचार तथा कार्रवाइयों के ज़रिये जनता को अपने पक्ष में करने में लगा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ़ शिक्षा के भगवाकरण के ज़रिये वह पूरे देश में चेतना को कुन्द करके समाज की मेधा को अपने नियंत्रण में करने की कोशिश कर रहा है। यही नहीं वह मिथ्या और झूठ को सामान्य ज्ञान के रूप में स्थापित कर अपने नापाक इरादों की पूर्ति को सुगम बना रहा है। संघ के इन नापाक इरादों को विफल करने के लिए, आज देश की तमाम प्रगतिशील और क्रान्तिकारी ताक़तों का यह दायित्व बनता है कि वे शिक्षा के भगवाकरण की मुहिम का पुरज़ोर विरोध करें और अपनी समझ को लेकर जनता के बीच जाएँ और संघी फ़ासिस्टों के नापाक मंसूबों के ख़िलाफ़ जनान्दोलनों को तेज़ करें।















