Category Archives: गतिविधि बुलेटिन

‘नौजवान भारत सभा’ के बैनर तले खदरा इलाक़े के नागरिकों द्वारा धरना-प्रदर्शन

‘नौजवान भारत सभा’ ने पिछले साल ही इलाके के लोगों के साथ मिलकर यह संकल्प लिया था कि इस बरसात के मौसम में सरकारी उपेक्षा के चलते बेगुनाह बच्चों और नागरिको को मौत का शिकार नहीं होने देंगे। इसी के मद्देनज़र पिछले एक साल से चल रही लड़ाई को पिछले महीने अपने निर्णायक दौर में पहुँचाने के लिए गतिविधियाँ तेज़ कर दी गयीं। जून के महीने के पहले हफ्ते से ही पूरे खदरा (विशेषकर वे इलाके जहाँ पिछले वर्ष ज़्यादा लोग बीमार पड़े थे) में गली मीटिंगों का जाल बिछा दिया गया। हर रात 8.30 बजे दो से तीन गलियों के लोगो का जुटान किया जाता था और फिर समस्या के सन्दर्भ में पूरी बात रखते हुए, लोगों को एकजुट होकर प्रशासन के समक्ष अपनी माँगें रखने के लिए तैयार किया जाता था। बाबा का पुरवा, मशालची टोला और रामलीला मैदान के निवासियों की कुल आठ गली मीटिंगें आयोजित की गयीं। इन मीटिंगों में साझा तौर पर यह तय किया गया कि 20 जून, 2011 को नगर निगम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जायेगा और नगर आयुक्त महोदय को एक छः सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल द्वारा अपना माँगपत्रक सौंपा जायेगा।

श्रम क़ानूनों के उल्लंघन के खिलाफ दिल्ली मेट्रो कामगार यूनियन के नेतृत्व में मेट्रो रेल ठेका कर्मचारियों के संघर्ष का नया दौर शुरू

11 जुलाई को दिल्ली मेट्रो रेल कर्मचारियों ने अपने आन्दोलन के नये दौर की शुरुआत करते हुए नई दिल्ली में जन्तर-मन्तर पर प्रदर्शन किया और मेट्रो के निदेशक ई. श्रीधरन का पुतला दहन किया। पिछले करीब ढाई वर्षों से दिल्ली मेट्रो रेल के ठेका कर्मचारियों की यूनियन ‘दिल्ली मेट्रो कामगार यूनियन’ मेट्रो रेल के कर्मचारियों को बुनियादी श्रम अधिकार भी नहीं मिलने के खिलाफ़ संघर्ष कर रही है। इस संघर्ष की शुरुआत 2008 में मेट्रो रेल स्टेशनों पर काम करने वाले सफ़ाई कर्मचारियों के आन्दोलन से हुई थी।

भारत में जनवादी अधिकार आन्दोलन : दिशा, समस्याएँ, और चुनौतियाँ

अपने अनन्य सहयात्री दिवंगत का. अरविन्द की स्मृति में इसं बार तीसरी अरविन्द स्मृति संगोष्ठी का आयोजन हम उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कर रहे हैं। सामयिकता और प्रासंगिकता की दृष्टि से इस बार तीन दिवसीय अखिल भारतीय संगोष्ठी का विषय रखा गया है : ‘भारत में जनवादी अधिकार आन्दोलन : दिशा, समस्याएँ और चुनौतियाँ।’

शहीदे-आज़म भगतसिंह के 80वें शहादत दिवस पर लखनऊ में नुक्कड़ सभाओं का आयोजन

23 मार्च, 2011 को भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के 80वें शहादत दिवस के मौके पर लखनऊ के खदरा इलाके में ‘नौजवान भारत सभा’ के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर भगतसिंह और उनके साथियों को याद किया। इस मौके पर ‘हवा में रहेगी मेरे ख़यालों की बिजली, ये मुश्ते ख़ाक है फानी, रहे रहे न रहे’ नामक पर्चे को लेकर नौजवान भारत सभा के दस्ते ने खदरा इलाके के बाबा का पुरवा, मशालची टोला और दीनदयाल नगर में नुक्कड सभाएँ आयोजित कीं।

पटना में दो दिवसीय क्रान्तिकारी नवजागरण अभियान

देश के विभिन्न इलाकों में क्रान्तिकारी राजनीति का प्रचार-प्रसार करने और लोगों को संगठित करने की मुहिम में एक और डग भरते हुए, ‘दिशा छात्र संगठन’ और ‘नौजवान भारत सभा’ के कार्यकर्ताओं ने बिहार के पटना जिले में 15 और 16 मार्च को शहीदेआज़म भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के 80वें शहादत दिवस के मौके पर दो दिवसीय क्रान्तिकारी नवजागरण अभियान चलाया।

गोरखपुर में आन्दोलनरत मज़दूरों पर मालिकों का क़ातिलाना हमला

गोरखपुर जैसे शहर के लिए, जो देश के बडे़ औद्योगिक केन्द्रो में नहीं आता, और राजनीतिक सरगमियों के लिहाज़ से एक पिछड़ा हुआ शहर माना जाता है, यह एक बड़ी घटना थी कि वहाँ से करीब 2000 मज़दूर इकट्ठा होकर देश की राजधानी पहुंच जायें। इस इलाके के फैक्टरी मालिकों के शब्दों में कहें तो इससे मज़दूरों का ‘’मन बढ़ जायेगा”। इसी डर के चलते फैक्टरी मालिक विशेषकर अंकुर उद्योग लिमिटेड और वी एन डायर्स लिमिटेड, स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लगातार मज़दूरों को इस देशव्यापी प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने का प्रयास कर रहे थे। इन सब कोशिशों को धता बताते हुए जब मज़दूर बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर दिल्ली चले गये तो मालिकों ने उन्हें ‘सबक सिखाने’ का तय किया। फलस्वरूप 3 मई, 2011 को अंकुर उद्योग लिमिटेड से करीब 18 मज़दूरों को बिना कोई कारण बताये फैक्टरी से निकालने का नोटिस थमा दिया गया। इस पर मज़दूर फैक्टरी के बाहर विरोध ज़ाहिर करने के लिए इकट्ठा होने लगे। मालिकों को यह पहले से ही पता था, और इसीलिए प्रदीप सिंह नामक एक हिस्ट्रीशीटर को तीन अन्य गुण्डों के साथ मौका-ए-वारदात पर बुला रखा था। धरना-प्रदर्शन और नारेबाज़ी शुरू होते ही इन गुण्डो ने फैक्टरी की छत पर चढ़कर निहत्थे मज़दूरों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें 19 मज़दूर घायल हो गये।

भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को बिगुल मज़दूर दस्ता, नौजवान भारत सभा और जागरूक नागरिक मंच द्वारा क्रान्तिकारी श्रद्धांजलि

भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव की 80वीं (23 मार्च 1931) बरसी पर क्रान्तिकारी जागृति अभियान के दौरान ग़ाजियाबाद में क्रान्तिकारी श्रद्धांजलि दी गयी। इस अवसर पर बिगुल मज़दूर दस्ता, नौजवान भारत सभा और जागरूक नागरिक मंच के प्रवक्ताओं ने उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए मेहनतकश साथियों, परिवर्तनकामी नौजवानों और इन्साफपसन्द नागरिकों का आह्वान किया।

बिस्मिल के शहादत दिवस 19 दिसम्बर को क्रान्तिकारी जन-एकजुटता दिवस के रुप में मनाया गया

एक तरफ छात्र-नौजवान अपने नारों, पर्चों से क्रान्तिकारी विरासत को लोगों के दिलों में फिर से ज़िन्दा करने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ ऐसे तमाम फ़ासीवादी व बुर्जुआ संगठन ‘बिस्मिल’ की क्रान्तिकारी व साम्प्रदायिक विरोधी विरासत को ग़लत तरीक़े से पेश करके कलंकित करने का काम कर रहे थे। मज़दूरों का नाम लेकर उनकी पीठ में छुरा भोंकने वाले कुछ संशोधनवादी “मौन जुलूस” (मुर्दा जुलूस) निकालकर यह बता रहे थे कि आज के दौर में उनकी राजनीति किसका पक्ष ले रही है? ज़ाहिर सी बात है कि मौन रहने से यह वर्तमान व्यवस्था का ही पक्ष लेगी।

नौजवान भारत सभा द्वारा सफ़ाई एवं स्वास्थ्‍य के मुद्दे पर संघर्ष की शुरुआत

आह्वान के पिछले अंक में हमने जो रिपोर्ट दी थी। वह यह थी कि लखनऊ के खदरा क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया, मियादी लोगों द्वारा चिन्‍ह‍ित समस्याएँ थीं कि नालियों की सफ़ाई नहीं होती, जिसमें पानी इकट्ठा होता है और मच्छर पनपते हैं और भी तमाम परेशानियाँ होती हैं। पीने का पानी जो सप्लाई द्वारा आता है, वह कई बार बदबूदार व झागदार होता है, हैण्डपाइप कई महीनों-सालों से ख़राब हैं, शिकायत-पत्र देने पर भी ठीक नहीं किये जाते और तरह-तरह के बहाने बनाकर टाल दिया जाता है। बाक़ी तीन मुद्दे नौजवान भारत सभा द्वारा भी सुझाये गये कि इस इलाक़े में एक सरकारी डिस्पेंसरी होनी चाहिए। क्षेत्र में पर्याप्त मात्र में कूडे़दान रखे जायें और हर माह क्लोरीन की गोली भी बाँटी जाये, ताकि लोग साफ पानी पी सकें। सभा में लगभग 100 लोगों ने भागीदारी की, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएँ भी थीं। सभी ने किसी भी वक़्त साथ खड़े होने की बात की।

डॉ. विनायक सेन को रिहा करो

सभी ने एक स्वर में विनायक सेन के आजीवन कारावास की सज़ा का विरोध किया, और इसे जनता के जनवादी लोकतान्त्रिक अधिकारों पर राज्य का घिनौना हमला घोषित किया। नौजवान भारत सभा और संयुक्त मज़दूर अधिकार संघर्ष मोर्चा के संयोजक तपिश ने कहा कि यह अकेले डॉ. सेन का मामला नहीं है। देश के हुक्मरान चाहते हैं कि देशवासी सभी अन्याय-अत्याचार चुपचाप बर्दाश्त करते रहें, लोकतान्त्रिक विरोध की सभी सीमित गुंजाइशें तक उन्हें नागवार गुज़र रही हैं।