भारतीय शिक्षा के लिए घातक! – विदेशी विश्वविद्यालय
वर्तमान में भी जब बजट के माध्यम से कोरपोरेट जगत को 5,00,000 करोड़ का तोहफा दिया गया है तब शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ 4 प्रतिशत खर्च होता है। माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों में से केवल 7 प्रतिशत की पहुँच ही उच्च शिक्षा तक है। बरसों से इसे 15 प्रतिशत करने की बात की जा रही है लेकिन इन सभी बुनियादी ज़रूरतों को नज़रअन्दाज़ करते हुए शिक्षा को निजी स्वार्थो और आर्थिक लाभों के लिए विदेशी हाथों में बेचने का मसविदा तैयार किया जा रहा है। यह पूँजी के हितों के प्रति कटिबद्ध पूँजीपतियों की प्रबन्धन समिति के रूप में काम करने वाली सरकार की शिक्षा नीति ही है, जिसका फल आम नौजवानों को भुगतना पड़ रहा है।











