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शहीद-ए-आज़म भगतसिंह के जन्मदिवस (28 सितम्बर) के अवसर पर रोहतक में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

पाँच दिन तक चले इस अभियान के दौरान वक्ताओं ने विस्तारपूर्वक लोगों से अपनी बात साझा की। अभियान के दौरान वक्ताओं ने बताया कि भगतसिंह और उनके साथियों के लिए आज़ादी की लड़ाई का मतलब था; क्रान्ति के द्वारा मेहनतकश जनता का राज स्थापित करना, जिसमें उत्पादन, राजकाज और समाज के पूरे ढाँचे पर आम मेहनतकश जनता काबिज हो। अपने क्रान्तिकारी संगठनों ‘एच.आर. ए.’, ‘एच. एस.आर.ए.’ और नौजवान भारत सभा के घोषणापत्रों में, अदालतों में दिये गये बयानों में, लेखों और जेलों से भेजे गये सन्देशों में भगतसिंह और उनके साथियों ने बार-बार इस बात को साफ़ किया था कि वे लोग मेहनतकशों के राज के हिमायती थे।

काकोरी एक्शन के शहीदों की शान में कार्यक्रम

काकोरी एक्शन के शहीदों के शहादत के अवसर पर रोहतक, हरियाणा में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके तहत महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के लॉन में पोस्टर एवं पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया तथा काकोरी एक्शन के शहीदों की याद में निकाले गये परचे का व्यापक वितरण किया गया।

बढ़ते स्त्री विरोधी अपराधों के ख़िलाफ़ परचा वितरण

साल 2004 में जहाँ बलात्कार के 18,223 मामले दर्ज हुए थे वहीं साल 2014 में इनकी संख्या बढ़कर 36,735 हो गयी! निर्भया-डेल्टा मेघवाल-जीशा और न जाने कितनी निर्दोष बलात्कार और हत्या की बली चढ़ा दी जाती हैं लेकिन कानून-पुलिस-नेताशाही और समाज मूकदर्शक बनकर देखते रह जाते हैं।