बेबी की कविताएँ
चमकते
ठनकते
गरजते
बरसते
…हाथ….
इन हाथों को
फिर से
गढ़ने के दिन हैं
•
गीत अमलतास के
गीत गुलमोहर के
तपेंगे
ढलेंगे
गढ़ेंगे
सुन्दर कल।
•
ऐसे दिन भी आयेंगे।
जब हम प्यार को
अपने
खेतों में बो देंगे
सींचेंगे,
खर, पतवार चुनेंगे
जब पौधे लहलहायेंगे
हम रखवाली करेंगे
वहीं अपनी
एक मड़ैया डाल लेंगे.
पकी हुई फसल का
गीत
हमें याद दिलाता रहेगा.
हममें पल रही है एक
जिद
कि
जब हम
काट लायें
तैयार फसल
प्यार
हममें बहे
अपने उद्दाम आवेग
के साथ
जैसे बहता है
जीवन
कि उसके बीज हमें जुगाने हैं
अगली बोआई के लिए.
…………
अभी तो
खेतों को
तैयार करने के दिन हैं
•
रोज
कोड़ता हूँ
घोंघे, सितुए
कंकड.पत्थर
चुन.चुनकर फेंकता हूँ
कि
कल
बो दूँगा तुझे
जिन्दगी
मुक्तिकामी छात्रों-युवाओं का आह्वान, जुलाई-दिसम्बर 2012






