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Tag Archives: क्यूबा

संकट से गुज़रता क्यूबा: यह उथल-पुथल अप्रत्याशित नहीं

August 15, 2022 - राष्‍ट्रीय/अर्न्‍तराष्‍ट्रीय मुद्दे - Tagged: अन्तरराष्ट्रीय, क्यूबा, लता - 8022no commentshttps%3A%2F%2Fahwanmag.com%2Farchives%2F8022%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F+%E0%A4%B8%E0%A5%87+%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE+%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%BE%3A+%E0%A4%AF%E0%A4%B9+%E0%A4%89%E0%A4%A5%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A5%E0%A4%B2+%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%A4+%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%822022-08-15+17%3A38%3A21ahwanmaghttps%3A%2F%2Fahwanmag.com%2F%3Fp%3D8022

संकट से गुज़रता क्यूबा: यह उथल-पुथल अप्रत्याशित नहीं लता क्‍यूबा, करेबियन सागर स्थित एक द्वीप जो अमेरिकी साम्राज्‍यवाद को आइना दिखाने के लिए अक्‍सर चर्चा में रहा है, इस वर्ष…

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आह्वान के बारे में कुछ महत्त्वपूर्ण विचारबिन्दु

  • ‘आह्वान’ विपर्यय के इस कठिन अँधेरे दौर में क्रान्ति के नये संस्करण की तैयारी के लिए युवा वर्ग का आह्वान करता है। यह एक नूतन क्रान्तिकारी नवजागरण और प्रबोधन का शंखनाद करता है। यह नयी क्रान्ति की नेतृत्वकारी शक्ति के निर्माण के लिए, उसकी मार्गदर्शक वैज्ञानिक जीवनदृष्टि और इतिहासबोध की समझ कायम करने के लिए और भारतीय क्रान्ति के रास्ते की सही समझदारी कायम करने के उद्देश्य से विचार-विनिमय और बहस-मुबाहसे के लिए आम जनता के विवेकशील बहादुर युवा सपूतों को आमन्त्रित करता है। ‘आह्वान’ क्रान्ति की आत्मा को जागृत करने की ज़रूरत का अहसास है। यह एक नयी क्रान्तिकारी स्पिरिट पैदा करने की तड़प की अभिव्यक्ति है। लोग यदि लोहे की दीवारों में कैद नशे की गहरी नींद सो रहे हैं, तब भी हमें लगातार आवाज़ लगानी ही होगी। नींद में घुट रहे लोगों के कानों तक लगातार पहुँचती हमारी आवाज़ कभी न कभी उन्हें जगायेगी ही। भूलना नहीं होगा कि एक चिंगारी सारे जंगल को आग लगा सकती है। ‘आह्वान’ ऐसी ही एक चिंगारी बनने को संकल्पबद्ध है।
  • ‘आह्वान’ ज़िन्दगी के इस दमघोंटू माहौल को बदलने के लिए तमाम ज़िन्दा लोगों का आह्वान करता है। यह उन सभी का आह्वान करता है जो सही मायने में नौजवान हैं। जिनमें व्यक्तिगत स्वार्थ, कायरता, दुनियादारी, धन लिप्सा, कैरियरवाद और पद-ओहदे-हैसियत-मान्यता की गलाकाटू प्रतिस्पर्धा के ख़िलाफ़ लड़ने का माद्दा और ज़िद है, जिनकी रगों में उष्ण रक्त प्रवाहित हो रहा है। जो न्याय, सौन्दर्य, प्रगति और शौर्य के पुजारी हैं। ‘आह्वान’ जनता की सेवा में लग जाने के लिए, मेहनतकश अवाम में घुलमिलकर उसकी मुक्ति का परचम थाम लेने के लिए ऐसे ही नौजवानों का आह्वान करता है। सामाजिक क्रान्तियों की कठिन शुरुआत की चुनौतियों को स्वीकारने के लिए पहले जनता के बहादुर युवा सपूत ही आगे आते हैं। इतिहास के रथ के पहिए नौजवानों के उष्ण रक्त से लथपथ हुआ करते हैं।
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