पाठक मंच
मैं ‘आह्वान’ का नियमित पाठक रहा हूँ। पिछले कुछ समय से मैं सामाजिक कामों से भी जुड़ा हुआ हूँ। पिछले अंक में साथी अरविन्द की असमय मृत्यु के बारे में जानकर बेहद दुख हुआ। साथी अरविन्द हमारे लिए निश्चित रूप से प्रेरणा का अजस्र स्रोत बने रहेंगे। मैं तहे-दिल से उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
पिछले अंक वैश्विक मन्दी पर आधारित लेख ने मौजूदा मन्दी के मूल कारणों को सरल तरीके से समझाया। महँगाई की वजहों का विश्लेषण करने वाला लेख भी युवा वर्ग को शिक्षित करता है। स्मृति संकल्प यात्रा की रिपोर्ट से छात्रों-युवाओं की निराशा टूटेगी और वे समझेंगे कि सबकुछ शान्त नहीं है और लोग चुपचाप नहीं बैठे हैं।
– योगेश, दिल्ली
ढूँढ़ रहा हूँ आदमी
ढूढ रहा हूँ आदमी, पर मिलता ही नहीं
मिलते हैं तो मंदिर के पुजारी
राजनीति के नेता
घर के शासक, बाहर के प्रशासक
समाज के महापुरुष और उनके अनुयायी
चमडे के जूतों व कोटों मे लिपटे
सभ्यता के दिखावटी व असभ्यता के कर्मठी लोग
पता पूछने पर
पता चलता है कि
आदमी का कोई पता नहीं मिलता
पता है घर का , मुहल्ले का, नगर का,
पर
आदमी का पता नहीं है
– अपूर्व मालवीय, गोरखपुर
मुक्तिकामी छात्रों-युवाओं का आह्वान, जनवरी-मार्च 2009






