स्मृति संकल्प यात्रा के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम जारी

23 मार्च, 2005 को भगत सिंह और उनके साथियों के 75 शहादत वर्ष के आरम्भ पर शुरू की गई स्मृति संकल्प यात्रा के तहत देश के विभिन्न क्रान्तिकारी संगठन पिछले दो वर्षों से भगतसिंह के उस सन्देश पर अमल कर रहे हैं जो उन्होंने जेल की कालकोठरी से नौजवानों को दिया था; कि छात्रों और नौजवानों को क्रान्ति की अलख लेकर गाँव-गाँव, कारखाना-कारखाना, शहर-शहर, गन्दी झोपड़ियों तक जाना होगा। इस अभियान के दौरान इन जनसंगठनों ने जो भी जनकार्रवाइयाँ की हम उसका एक संक्षिप्त ब्यौरा देते रहे हैं और इस बार भी यहाँ दे रहे हैं। जिन इलाकों में अभियान की टोलियों ने मुहिम चलाई उनमें उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद, लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर, नोएडा, ग़ाज़ियाबाद, हापुड़; पंजाब में जालंधर, लुधियाना, संगरूर, अम्बाला आदि जैसे शहर और साथ ही दिल्ली समेत पूरा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र भी शामिल है। इनमें से कुछ स्थानों की अभियान सम्बन्धी रिपोर्टें हम यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं।

इस 23 मार्च को इस यात्रा के तीन साल पूरे हो जाएँगे। यह यात्रा भगतसिंह के जन्मशताब्दी वर्ष के समापन पर 28 सितम्बर, 2008 को ख़त्म होगी। इस अवसर पर दिशा छात्र संगठन और नौजवान भारत सभा की देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद इकाइयाँ विशेष कार्यक्रम करेंगी। इस अंक के आने तक देश के अलग-अलग हिस्सों में जो अभियान चल रहे हैं उनकी रिपोर्ट इस बार के अंक में दी जा रही हैं। इन तीन वर्षों के दौरान ये दोनों ही संगठन अपनी सभी गतिविधियाँ स्मृति संकल्प यात्रा के बैनर तले ही कर रहे हैं। – सम्पादक

नौजवान भारत सभा और दिशा छात्र संगठन द्वारा अशफ़ाक-बिस्मिल के शहादत दिवस (19 दिसम्बर) पर कौमी एकता मार्च

19 दिसम्बर, 2007 को काकोरी काण्ड के शहीदों की फ़ाँसी के 80 बरस पूरे हुए। इन शहीदों में अशफ़ाकउल्ला और राम प्रसाद बिस्मिल भी शामिल थे। इन दोनों के बीच अटूट मित्रता थी। लिहाज़ा, इस दिन को कौमी एकता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

इस मौके पर नौजवान भारत सभा और दिशा छात्र संगठन ने एक कौमी एकता मार्च का आयोजन किया जो करीब 7 किमी लम्बा था। यह मार्च मुस्तफ़ाबाद से शुरू होकर मुकुन्द विहार में नौजवान भारत सभा के कार्यालय पर समाप्त हुआ। इस मार्च में करीब 80 नौजवान शामिल हुए। इन नौजवानों के हाथ में बिस्मिल और अशफ़ाकउल्ला की तस्वीरें और तख्तियाँ थीं, जिन पर कौमी एकता के नारे लिखे थे। ये नौजवान ‘मेहनतक़श की वर्ग एकता-ज़िन्दाबाद’, ‘जाति-धर्म के झगड़े छोड़ो, सही लड़ाई से नाता जोड़ो’, ‘साम्प्रदायिक फ़ासीवाद मुर्दाबाद’, ‘फ़ासीवाद की कब्र खुदेगी, हिन्दुस्तान की धरती पर’ जैसे नारे लगा रहे थे। इस मार्च में शामिल नौजवान कौमी एकता पर एक पर्चा भी जनता के बीच बाँटते हुए चल रहे थे।

कई जगह पास से गुज़रने वाले जवान, बूढ़े और बच्चे भी इस मार्च में शामिल हो गये और कुछ दूर तक इसके साथ चले। नुक्कड़ों-चौराहों पर जुलूस कुछ समय के लिए रुकता था और युवाओं की एक टीम आस-पास कौमी एकता का पर्चा बाँटती थी। यह मार्च पूरे इलाके में, जो कि हिन्दू-मुसलमान मिश्रित इलाका है, चर्चा का विषय बन गया। बाद में भी लोगों ने इसके बारे में जानने के प्रयास किये और इस पहल की प्रशंसा की।

भगतसिंह के 100वें जन्मवर्ष की शुरुआत में स्मृति संकल्प यात्रा के तहत देश के विभिन्न इलाकों में कार्यक्रम

दिल्ली। 27 सितम्बर को भगतसिंह के जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत की पूर्वसन्ध्या पर नौजवान भारत सभा ने करावलनगर में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम किया। इस कार्यक्रम में ‘किस्सा-ए–आज़ादी उर्फ़ 60 साल की बर्बादी’ का मंचन किया गया और साथ ही क्रान्तिकारी गीत पेश किये गये। नौभास के आशीष, आशू और अभिनव ने सभा को सम्बोधित किया। वक्ताओं ने भगतसिंह के जन्मशताब्दी पर भगतसिंह के विचारों को एक बार फ़िर से याद करने और उन्हें आगे बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

28 सितम्बर को दिशा छात्र संगठन ने नॉर्थ कैम्पस, दिल्ली विश्वविद्यालय में एक साईकिल जुलूस निकाला। इस साईकिल जुलूस में करीब 70 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। यह साईकिल यात्रा नॉर्थ कैम्पस के सभी कॉलेजों और फ़ैकल्टियों में गई। यहाँ पर संक्षिप्त सभाओं का आयोजन किया गया। इन सभाओं में युवाओं को आज के हालात और सरकार के शिक्षा के प्रति रुख़ से वाकिफ़ कराते हुए बताया गया कि फ़ीसें बढ़ाकर शिक्षा को तेज़ी से बाज़ारू माल बनाया जा रहा है। इस लक्ष्य है आम नौजवानों को कैम्पस से बाहर खदेड़ना क्योंकि उन्हीं में देश को बदलने के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करने का जज़्बा होता है। नतीजतन कैम्पसों को नवधनाढ्यों से भरने की साज़िश की जा रही है। ऐसे में भगतसिंह के विचारों और स्पिरिट को फ़िर से ज़िन्दा करने की ज़रूरत पर बल दिया गया। इस साईकिल जुलूस को शहीदे-आज़म विचार यात्रा नाम दिया गया।

लखनऊ। लखनऊ में भी छात्रों-युवाओं की टोलियों ने दिशा छात्र संगठन और नौजवान भारत सभा के नेतृत्व में पुस्तक व पोस्टर प्रदर्शनियाँ लगाकर भगतसिंह के विचारों का प्रचार-प्रसार किया और इसी रूप में भगतसिंह के जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत को मनाया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने भगतसिंह के सन्देशों वाले टीशर्ट पहन रखे थे।

इलाहाबाद। इलाहाबाद में छात्रों की टोलियों ने हॉस्टलों, ट्रेनों आदि में भगतसिंह और उनके साथियों के विचारों से परिचय कराते हुए पर्चे बाँटे। इसके अतिरिक्त वहाँ दिशा छात्र संगठन और नौजवान भारत सभा के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में जुलूस निकाला। ‘देश को आगे बढ़ाओ’ नामक नुक्कड़ नाटक का भी मंचन किया गया। 28 सितम्बर को साईकिल जुलूस का आयोजन किया गया।

गोरखपुर। गोरखपुर में दिशा और नौभास द्वारा संयुक्त रूप से भगतसिंह सप्ताह का आयोजन किया। सप्ताह की शुरुआत भगतसिंह जन्मशताब्दी मार्च की शुरुआत से हुई। मार्च के दौरान रास्ते भर कई जगह नुक्कड़ नाटक और सभाएँ की गयीं। सप्ताह के अन्य कार्यक्रमों में गोरखपुर विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर छात्रों की भारी भीड़ के समक्ष देश-विदेश के चुनिन्दा कवियों की क्रान्तिकारी कविताओं की ओजपूर्ण और भावनापूर्ण प्रस्तुतियाँ की गयीं। 28 सितम्बर को बेतियाहाता चौक स्थित भगतसिंह की प्रतिमा पर कुर्बानी और वीरता के प्रतीक के रूप में 100 लाल गुब्बारों को उड़ाया गया।

ग़ाज़ियाबाद। यहाँ दिशा और नौभास की संयुक्त टीमों ने 23 सितम्बर से 30 सितम्बर के बीच विभिन्न मुहल्लों में सांस्कृतिक आयोजन किये। विजयनगर, रेलवे स्टेशन, नोएडा, मात्रिका विहार, खोड़ा के इलाकों में छात्रों-नौजवानों की टोलियाँ गईं। तमाम स्थानों पर मशाल जुलूसों, नुक्कड़ नाटकों, प्रभात फ़ेरियों, साईकिल यात्राओं, आदि के जरिये भगतसिंह के सन्देश को ले जाया गया। नोएडा के मज़दूर इलाकों में भी साईकिल जुलूस और मशाल जुलूस का आयोजन किया गया। इस बीच भारी पैमाने पर पर्चा वितरण किया गया।

लुधियाना। नौजवान भारत सभा ने यहाँ पर जन्मशताब्दी की शुरुआत के अवसर पर एक एकदिवसीय युवा सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें पूरे पंजाब से भारी संख्या में नौजवानों के अतिरिक्त युवा मज़दूरों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दिन सम्मेलन स्थल पर करीब 500 नौजवान मौजूद थे। इस सम्मेलन का समापन एक जुलूस के साथ किया गया। इस सम्मेलन के अंत में कई प्रस्ताव पेश किये गये। इनमें से एक प्रस्ताव था कि भगतसिंह के खोए हुए साहित्य को ढूँढने के लिए सरकार एक कमीशन का गठन करें। दूसरा प्रस्ताव यह था कि भगतसिंह के साहित्य को छपवा कर देश के हर पुस्तकालय तक पहुँचाया जाय और भगतसिंह के लेखों को हर स्तर के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाय। एक प्रस्ताव में यह माँग भी की गयी कि साण्डर्स कत्ल में भगतसिहं द्वारा इस्तेमाल की गयी पिस्तौल को किसी राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा जाय, जिसे अभी भी अपराधियों के साथ मिले हथियारों के साथ फ़िलौर जेल में रखा गया है। चारों प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए।

 

मुक्तिकामी छात्रों-युवाओं का आह्वान, जनवरी-मार्च 2008

 

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