धूल की जगह राख होना चाहूँगा मैं!
धूल की जगह राख होना चाहूँगा मैं!
मैं चाहूँगा कि एक देदीप्यमान ज्वाला बन जाये
भड़ककर मेरी चिनगारी
बजाय इसके कि सड़े काठ में उसका दम घुट जाये।
एक ऊँघते हुए स्थायी ग्रह के बजाय
मैं होना चाहूँगा एक शानदार उल्का
मेरा प्रत्येक अणु उद्दीप्त हो भव्यता के साथ।
मनुष्य का सही काम है जीना, न कि सिर्फ जीवित रहना।
अपने दिन मैं बर्बाद नहीं करूँगा
उन्हें लम्बा बनाने की कोशिश मैं।
मैं अपने समय का इस्तेमाल करूँगा।







