अगर तुम युवा हो
शशि प्रकाश
चलना होगा एक फिर
बीहड़, कठिन, जोखिम भरी सुदूर यात्रा पर,
पहुँचना होगा उन ध्रुवांतों तक
जहाँ प्रतीक्षा है हिमशैलों को
आतुर ह्रदय और सक्रिय विचारों के ताप की|
भरोसा करना होगा एक बार फिर
विस्तृत और आश्चर्यजनक सागर पर|
उधर रहस्यमय जंगल के किनारे
निचाट मैदान के अँधेरे छोर पर
छिटक रही है जहाँ नीली चिंगारियाँ
वहाँ जल उठा था कभी कोई ह्रदय
राहों को रोशन करता हुआ|
उन राहों को ढूँढ़ निकालना होगा
और आगे ले जाना होगा
विद्रोह से प्रज्वलित ह्रदय लिए हाथो में
सर से ऊपर उठाये हुए.
पहुँचना होगा वहाँ तक
जहाँ समय टपकता रहता है
आकाश के अँधेरे से बूँद-बूँद
तड़ित उजाला बन|
जहाँ नीली जादुई झील में
प्रतिपल कांपता रहता अरुण कमल एक,
वहाँ पहुँचने के लिए
अब महज अभिव्यक्ति के नहीं
विद्रोह के सारे खतरे उठाने होंगे,
अगर तुम युवा हो!
मुक्तिकामी छात्रों-युवाओं का आह्वान,नवम्बर-दिसम्बर 2010






