आशावाद

वेणु गोपाल

तूफ़ान है
और जड़ों तक काँप रहा है पेड़।

लेकिन उसकी डाल पर बैठे
कवि के लिए
भविष्य उजला है
क्योंकी वह पेड़ नहीं
उसका काँपना नहीं
तूफ़ान नहीं
बल्कि पत्तों का हरापन
देख रहा है।

मुक्तिकामी छात्रों-युवाओं का आह्वान,मई-जून 2016