सपनों के बारे में एदुआर्दो गालिआनो की पाँच लघु कथाएँ

 

हेलेना के सपने

उस रात उन सपनों की एक कतार लग गयी जो चाहते थे कि हेलेना उन्हें देखे, लेकिन हेलेना के लिए उन सबको देखने के लिए चुन पाना मुमकिन नहीं था। उनमें से एक सपने ने जिसे हेलेना नहीं पहचानती थी, आग्रह कियाः मुझे देखने के लिए चुनो – मैं एकदम तुम्हारे लायक हूँ। मुझे देखो – तुम मुझे जरूर पसन्द करोगी।”

कुछ नये सपने जो हेलेना को पहले कभी नहीं आये थे, कतार में लगे हुए थे, लेकिन उसने उन मादक सपनों को पहचाना जो बार-बार लौटकर आते रहे थे, वह उदास सपना और दूसरे अजीब या धुँधले सपने, जो ऊँची उड़ान की रातों से उसके पुराने दोस्त थे।

सपनों के देश की यात्रा

हेलेना एक घोड़ागाड़ी में उस देश की यात्रा कर रही थी जहाँ सपने देखे जाते थे। उसके बाजू में कोचवान की सीट पर उसकी नन्हीं कुतिया पेपा लुम्पेहन बैठी थी। पेपा अपने पंजों तले एक मुर्गी लेकर चली थी जो उसके सपने में काम करने वाली थी। हेलेना अपने साथ एक बहुत बड़ी संदूकची ले चल रही थी जो मुखौटों और रंग-बिरंगे चिथड़ों से भरी हुई थी।

लोगों से भरी हुई सड़क धीरे-धीरे खिसक रही थी। वे सभी सपनों के देश की राह पर थे और अपने सपनों का पूर्वाभ्यास करते हुए इतनी लांछन भरी बातें कर रहे थे और इतना गुलगपाड़ा कर रहे थे कि पेपा सिर्फ झींख रही थी क्योंकि वह ठीक से ध्यान केन्द्रित नहीं कर पा रही थी।

सपनों का देश

उस देश में एक बहुत बड़ा शिविर लगा हुआ था।

वहाँ जादूगरों की ऊँची टोपियों में उगे हुए सलाद और चमकदार मिर्चियाँ थीं और चारों ओर लोग सपनों की लेन-देन कर रहे थे। एक आदमी प्यार के सपने के बदले यात्र का सपना बेच रहा था और दूसरा एक अच्छी रुलाई के सपने के बदले हँसाने वाले सपने की पेशकश कर रहा था।

एक आदमी अपने सपनों के टुकड़ों की खोज में इधर-उधर भटक रहा था जो किसी के रास्ते में आ गया था और उसने उसे तोड़ दिया था। वह आदमी टुकड़ों को इकट्ठा कर रहा था और बहुरंगी झण्डा बनाने के लिए उन्हें एक साथ चिपका रहा था।

सपनों का भिश्ती लड़का उनके लिए पानी ला रहा था जिन्हें सोने के साथ ही प्यास लग जाती थी। वह अपनी पीठ पर लदे मिट्टी के मशक में पानी ढो रहा था और उसे लम्बे गिलासों में ढाल रहा था।

मीनार में एक औरत थी जो सफेद अंगरखा पहने हुए थी और अपने लटों में कंघी कर रही थी जो उसके पैरों तक पहुँचते थे। कंघी सपनों को चारों ओर बिखेर रही थी, जो अपने सभी पात्रों से भरे हुए थेः उस औरत के बालों से सपने हवा में उड़ रहे थे।

भुला दिये गये सपने

हेलेना ने सपना देखा कि उसने अपने भुला दिये गये सपनों को एक टापू पर छोड़ दिया है।

क्लानरिबेल अलेग्रिया ने हेलेना के सपनों को एक साथ इकट्ठा किया, उन्हें एक रिबन से बाँधा और हिफ़ाज़त से छिपाकर रख दिया। लेकिन उसके बच्चों ने वह जगह खोज ली। वे हेलेना के सपनों को आजमाना चाहते थे। क्लानरिबेल ने उनसे सख्ती से कहाः

“उन्हें छूना भी नहीं।”

फिर उसने हेलेना को फोन लगाया और उससे पूछाः

तुम्हारे सपनों के साथ मुझे क्या करना चाहिए?”

सपने छुट्टी पर

सपने छुट्टी पर जा रहे थे। हेलेना रेलवे स्टेशन तक उनके साथ गयी। प्लेटफॉर्म से उसने उन्हें विदाई दी, रुमाल हिलाते हुए।

मुक्तिकामी छात्रों-युवाओं का आह्वान, मई-अक्‍टूबर 2015

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