सावित्रीबाई फुले की चार शीषर्कविहीन कविताएँ

सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस (3 जनवरी ) के अवसर पर

“ज्ञान के बिना सब खो जाता है
ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते हैं
इसलिए खाली न बैठो और जा कर शिक्षा लो
तुम्हारे पास सीखने का सुनहरा मौका है
इसलिए सीखो और जाति के बन्धन तोड़ो”

“गुलाब का फूल
और फूल कनेर का
रंग रूप दोनों का एक सा
एक आम आदमी
दूसरा राजकुमार
गुलाब की रौनक देसी फूलों से
उसकी उपमा कैसी?”

“पत्थर को सिंदूर लगाकर
और तेल में डुबोकर
जिसे समझा जाता है देवता
वो असल में होता है पत्थर”

हमारे जानी दुश्मन का
नाम है अज्ञान
उसे धर दबोचो
मज़बूत पकड़ कर पीटो
और उसे जीवन से भगा दो

मुक्तिकामी छात्रों-युवाओं का आह्वान,जनवरी-फरवरी 2018