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पाठक मंच

‘कतर में होने वाला फुटबाल विश्वकप, लूट और हत्या का खेल’ लेख भी अच्छा लगा जो बताता है कि किस तरह दुनियाभर की तमाम सरकारें जनता की बुनियादी ज़रूरतों को दरकिनार रखते हुए खेलों के बाजार पर अन्धाधुन्ध पैसा लुटा रही हैं। कतर में मूलभूत ढांचागत विकास के नाम पर मेहनतकशों की ज़िन्दगियों को मौत के मुँह में धकेला जा रहा है। विभिन्न जगहों पर किये गये कार्यक्रमों की रपटें भी अलग-अलग जगह पर होने वाले आन्दोलनों की अच्छी जानकारी देती हैं। चूंकि मुख्यधारा का मीडिया ऐसी खबरों को तवज्जो नहीं देता, इसलिए इस तरह की रपटें और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं। पत्रिका वैकल्पिक मीडिया के तौर पर महत्वपूर्ण कार्य कर रही है – उम्मीद है इसकी नियमितता बरकरार होगी।

हरियाणा में चला जाति तोड़ो अभियान

नौजवान भारत सभा (कलायत इकाई) द्वारा कलायत के सजूमा रोड स्थित हरिजन धर्मशाला में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंच संचालन नौभास के बण्टी ने किया। कार्यक्रम की शुरूआत में नौभास के उमेद ने बताया की राहुल सांकृत्यायन का पूरा जीवन जनता की चेतना को जगाने और पुरानी नकारात्मक परम्पराओं, रूढ़ियों, तर्कहीनता के खिलाफ सतत प्रचण्ड प्रहार करते रहे। राहुल जी का जीवन का सूत्र वाक्य था ‘भागो नहीं दुनिया को बदलो’ तभी अपनी अन्तिम साँस तक राहुल की लेखनी और यात्राएँ लगातार जारी रही। लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि आज की युवा पीढ़ी के राहुल के जनपक्षधर और रूढ़िभंजक विद्रोही साहित्य से परिचित नहीं है जिसका मुख्य कारण मौजूद सत्ताधारी भी हैं जिनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि जनता के सच्चे सिपाहियों के परिवर्तनकामी विचारों को दबाया या कुचला जा सके। ताकि जनता की चेतना को कुन्द बनाकर उस पर अपने शासन को मजबूत किया जा सके। लेकिन इतिहास ने भी ये बार-बार साबित किया है कि जनता के सच्चे जननायकों के विचार लम्बे समय नीम-अंधेरे में दबे नहीं रह सकते। इसलिए नौजवान भारत सभा जनता की चेतना जगाने के लिए राहुल सांकृत्यायन के यथास्थिति बदलने वाले विचारों को लेकर जनता तक जाती रहेगी।

हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था राम भरोसे!

शिक्षा के क्षेत्र में एनजीओ तो सक्रिय हैं ही, पीपीपी (पब्लिक-प्राईवेट पार्टनरशिप) के नाम पर इसे कम्पनियों को सौंपने की तैयारी भी हो रही है। योजना के तहत हरियाणा में पिछले 20 वर्षों में प्राइवेट स्कूलों की बाढ़-सी आयी है। सरकारी स्कूल तो लगातार खस्ता होते जा रहे हैं तो दूसरी ओर बड़े-बड़े फाइव-स्टारनुमा स्कूल राज्य के नेता-मंत्री या बड़े रसूखदार लोग खोलकर बैठे हैं। प्राइवेट स्कूल माफिया का सरकारों पर पूरा शिकंजा कसा हुआ है। हद तो तब हो गयी जब सरकार द्वारा तय 10 फीसदी ग़रीब बच्चों का कोटा तक इस गिरोह ने भरने से साफ मना कर दिया! यानी देश की जनता को भ्रम देने के लिए अमीर स्कूलों में ग़रीब बच्चों के लिए जो मज़ाकिया कोटा निर्धारित किया गया था, उसे भरना भी अब शिक्षा के माफ़ि‍या को नागवार गुज़र रहा है। शिक्षा को पूरी तरह बाज़ार के हवाले कर दिया गया है। ज़ाहिर-सी बात है कि देश की 77 फीसदी आबादी जो 20 रुपये प्रतिदिन से नीचे गुज़र-बसर करती हो उसके लिए तो शिक्षा के दरवाज़े बन्द हैं फिर चाहे संविधान को कितना ही भारी-भरकम बना दिया जाय, जो वास्तव में पहले ही तमाम लफ्फाजियों का मोटा पुलिन्दा है। पूँजीवादी व्यवस्था में हर चीज़ बिकने के लिए पैदा होती है। शिक्षा को भी पूरी तरह एक बिकाऊ माल बना दिया गया है तो कोई आश्चर्य नहीं।

रोहतक में निर्भया काण्ड के ख़िलाफ़ जन-अभियान व प्रदर्शन

पुलिस-प्रशासन की भूमिका आज अग्नि शमन विभाग से ज़्यादा नहीं रह गयी है। छेड़छाड़ और बलात्कार की दर्दनाक घटनाएँ हो जाने के बाद ही पुलिस-प्रशासन सकते में आता है। यदि इस देश की सरकारें स्त्रियों की सुरक्षा नहीं दे सकती, रोज़गार और शिक्षा नहीं दे सकती तो उनका काम क्या है? दूसरी बात आज समाज को पीछे ले जाने वाली ताक़तें भी समाज में सक्रिय हैं जो लड़कियों को घर की चार-दीवारी में ही कैद रखना चाहती हैं। इनके ख़िलाफ़ भी हमें एकजुट होना पड़ेगा, इनसे लोहा लेना पड़ेगा।

भगतिसंह, सुखदेव एवं राजगुरू के 84 वें शहादत दिवस के अवसर नोएडा, दिल्‍ली व नरवाना में कार्यक्रम

नोएडा के सेक्टर 63 स्थित छिजारसी में 21 से 23 मार्च तक शहीद मेला आयोजित किया गया। मेले के तीसरे व अंतिम दिन क्रांतिकारी गीतों एवं कविता पाठ तथा फि़ल्मों के अलावा पंजाब की तर्कशील सोसाइटी के साथियों ने अंधवि‍श्वास-तोड़क जादू के खेल दिखाये और पाखंडी बाबाओं, साधू-संतों के चंगुल से निकलने की अपील की तथा वैज्ञानिक व तर्कशील सोच को बढावा देने की जरूरत पर बल दिया। भगतिसंह, सुखदेव एवं राजगुरू के 84 वें शहादत दिवस के अवसर पर शहीद मेले से एक मशाल जुलूस भी निकाला गया जिसमें ‘भगतिसंह तुम जिन्दा हो हम सबके संकल्पों में’, ‘अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम’ जैसे गगनभेदी नारे लगाकर शहीदों के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया।

हरियाणा के नरवाना में निर्माण मज़दूरों ने संघर्ष के दम पर हासिल की जीत

अभी पिछले अप्रैल माह की 15 तारीख़ को भवन निर्माण क्षेत्र से जुड़े कुछ मज़दूरों ने अपनी मज़दूरी बढ़वाने के लिए नौजवान भारत सभा और बिगुल मज़दूर दस्ता से जुड़े कार्यकत्ताओं से सलाह-मशविरा किया। इन मज़दूरों का काम ट्राली-ट्रक इत्यादि से सीमेण्ट, बजरी, रेती आदि उतारने और लादने का होता है। मज़दूरी बेहद कम और पीस रेट के हिसाब से मिलती है। ज्ञात हो कि नौजवान भारत सभा और बिगुल मज़दूर दस्ता पिछले लगभग दो साल से हरियाणा में सक्रिय हैं। युवाओं से जुड़े तथा विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर प्रचार आदि के कारण और पिछले दिनों चले मारुति सुजुकी मज़दूर आन्दोलन में भागीदारी के कारण इन संगठनों की इलाक़े में पहचान है। बिगुल और नौभास के कार्यकर्ताओं ने निर्माण क्षेत्र से जुड़े मज़दूरों की तुरन्त यूनियन बनाने और यूनियन के तहत ही संगठित रूप से हड़ताल करने का सुझाव दिया। 15 तारीख़ को ही निर्माण मज़दूर यूनियन की तरफ़ से पर्चा लिखकर छपवा दिया गया और सभी मज़दूरों को एकजुट करके हड़ताल करने का निर्णय लिया गया। उसी दिन यूनियन की 11 सदस्यीय कार्यकारी कमेटी का चुनाव भी कर लिया गया। पहले दिन काम बन्द करवाने को लेकर कई मालिकों के साथ कहा-सुनी और झगड़ा भी हुआ, किन्तु अपनी एकजुटता के बल पर यूनियन ने हर जगह काम बन्द करवा दिया। 16 तारीख़ को यूनियन ने नौभास और बिगुल मज़दूर दस्ता की मदद से पूरे शहर में परचा वितरण और हड़ताल का प्रचार किया। मज़दूरों के संघर्ष और जुझारू एकजुटता के सामने 16 तारीख़ के ही दिन में मालिकों यानी भवन निर्माण से जुड़ी सामग्री बेचने वाले दुकानदारों ने हाथ खड़े कर दिये।

शहीदे-आज़म भगतसिंह युवा सम्मेलन का आयोजन

नौजवान भारत सभा के स्थानीय संयोजक रमेश खटकड़ के अनुसार भगतसिंह की शहादत के 81 साल बाद उनके गै़र-बराबरी, समतामूल समाज के सपने आज भी अधूरे ही हैं। इन सपनों को आज फिर से देश के नौजवानों के बीच लेकर जाना ज़रूरी ही नहीं बल्कि हमारे अस्तित्व की शर्त भी है। सम्मेलन में करीब 200 नौजवान छात्र-छात्राओं, नागरिकों, बच्चों ने भाग लिया। अन्त में नरवाना के भगतसिंह चौक तक जुलूस निकालकर कार्यक्रम की औपचारिक समाप्ति की गयी।

हरियाणा में शहादत दिवस अभियान तथा आरक्षण के प्रश्न पर क्रान्तिकारी प्रचार अभियान

भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव के 81 वें शहादत दिवस के अवसर पर नौजवान भारत सभा के द्वारा हरियाणा के नरवाना व कलायत में पर्चा वितरण किया गया। इसका मकसद शहीदों के विचारों को तथा उनके सपनों को आम जनता के बीच लेकर जाना था ताकि उनके सपने साकार किये जा सकें। नौभास के रमेश ने बताया कि भगतसिंह की क्रान्तिकारी धारा के लिए आज़ादी का मतलब मेहनतकश जनता की विदेशी तथा देशी दोनों प्रकार के शोषण से मुक्ति से था। छात्रों, युवाओं तथा मेहनतकश आम आबादी ने अभियान को काफी सराहा।

तीन दिवसीय क्रान्तिकारी जनजागृति यात्रा

नौजवान भारत सभा व दिशा छात्र संगठन की 15 सदस्यीय युवा टोली द्वारा हरियाणा के नरवाना (जीन्द) से कलायत (कैथल) तक तीन दिवसीय क्रान्तिकारी जनजागृति यात्रा निकाली गयी। 3 से 5 दिसम्बर तक नौजवान टोली ने साईकिलों द्वारा लगभग 60 किलोमीटर का फासला तय किया। क्रान्तिकारी जनजागृति यात्रा का मकसद शहीदों के सपनों को आम जनता तक पहुँचाना था। इस दौरान पर्चे बाँटे गये, क्रान्तिकारी साहित्य वितरित किया गया तथा नुक्कड़ सभाएँ व नुक्कड़ नाटक किये गये।

‘‘उभरती अर्थव्यवस्था’’ की उजड़ती जनता

हमारे देश का कारपोरेट मीडिया और सरकार के अन्य भोंपू समय-समय पर हमें याद दिलाते रहते हैं कि हमारा मुल्क ‘‘उभरती अर्थव्यवस्था’’ है; यह 2020 तक महाशक्ति बन जाएगा; हमारे मुल्क के अमीरों की अमीरी पर पश्चिमी देशों के अमीर भी रश्क करते हैं; हमारी (?) कम्पनियाँ विदेशों में अधिग्रहण कर ही हैं; हमारी (?) सेना के पास कितने उन्नत हथियार हैं; हमारे देश के शहर कितने वैश्विक हो गये हैं; ‘इण्डिया इंक.’ कितनी तरक्की कर रहा है, वगैरह-वगैरह, ताकि हम अपनी आँखों से सड़कों पर रोज़ जिस भारत को देखते हैं वह दृष्टिओझल हो जाए। यह ‘‘उभरती अर्थव्यवस्था’’ की उजड़ती जनता की तस्वीर है। भूख से दम तोड़ते बच्चे, चन्द रुपयों के लिए बिकती औरतें, कुपोषण की मार खाए कमज़ोर, पीले पड़ चुके बच्चे! पूँजीपतियों के हितों के अनुरूप आम राय बनाने के लिए काम करने वाला पूँजीवादी मीडिया भारत की चाहे कितनी भी चमकती तस्वीर हमारे सामने पेश कर ले, वस्तुगत सच्चाई कभी पीछा नहीं छोड़ती। और हमारे देश की तमाम कुरूप सच्चाइयों में से शायद कुरूपतम सच्चाई हाल ही में एक रिपोर्ट के जरिये हमारे सामने आयी।