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ऐसे पढ़ेगा इण्डिया, ऐसे बढ़ेगा इण्डिया?

भारतीय हुक्मरानों को नये-नये हवाई नारे देने का बहुत शौक चढ़ा हुआ है। ऐसा ही एक नारा है – ‘‘पढ़ेगा इण्डिया, तभी तो बढ़ेगा इण्डिया’’। जरा पूछिए इनसे, तुम्हारे इतने बुरी स्कूली व्यवस्था के रहते कैसे पढ़ेगा इण्डिया, कैसे बढ़ेगा इंडिया?

ड्रोन हमले – अमेरिकी हुक्मरानों का खूँखार चेहरा

‘कण्ट्रोल रूम’ में बैठे आपरेटरों के लिए यह सब एक वीडियो गेम की तरह होता है। सामने खड़े इन्सानों को मारने की तुलना में कम्प्यूटर स्क्रीन पर दिखायी दे रहे ‘टारगेट’ को बटन दबाकर उड़ा देना कहीं आसान होता है। इसलिए हमले की क्रूरता और भी बढ़ जाती है। शादी, मातम, या अन्य अवसरों पर इकट्ठा हुए लोगों के भारी समूह एक बटन दबाकर उड़ा दिये जाते हैं। घरों में सो रहे लोगों को एक पल में मलबे के ढेर में मिला दिया जाता है। बसों-कारों में बैठी सवारियों की ज़िन्दगी का सफ़र किसी “आतंकवादी” के सवार होने के शक के आधार पर ख़त्म कर दिया जाता है। यहाँ तक कि अकसर हमले के बाद घायलों और मृतकों के पारिवारिक सदस्यों, आम लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तक को फिर से मिसाइल दाग कर निशाना बनाया जाता है।

‘पंजाब (सार्वजनिक व निजी जायदाद नुकसान रोकथाम) क़ानून- 2014’ जनसंघर्षों को कुचलने की नापाक कोशिश

यह क़ानून भारत के बेहद ख़तरनाक जनविरोधी काले क़ानूनों में से एक है। इस क़ानून में कहा गया है कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह, संगठन, या कोई पार्टी द्वारा की गयी कार्रवाई जैसे “ऐजीटेशन, स्ट्राइक, हड़ताल, धरना, बन्द, प्रदर्शन, मार्च, जुलूस”, रेल या सड़क परिवहन रोकने आदि से अगर सरकारी या निजी जायदाद को कोई नुकसान, घाटा, या तबाही हुई हो तो उस कार्रवाई को नुकसान करने वाली कार्रवाई माना जायेगा। किसी संगठन, यूनियन या पार्टी के एक या अधिक पदाधिकारी जो इस नुकसान करने वाली कार्रवाई को उकसाने, साजिश करने, सलाह देने, या मार्गदर्शन, में शामिल होंगे उन्हें इस नुकसान करने वाली कार्रवाई का प्रबन्धक माना जायेगा। सरकार द्वारा तय किया गया अधिकारी अपने तय किए गये तरीक़े से देखेगा कि कितना नुकसान हुआ है। नुकसान की भरपाई दोषी माने गये व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा अगर नहीं की जाती तो उनकी ज़मीन जब्त की जायेगी।

लखविन्दर की तीन कविताएँ

हम सीख लेंगे
वो सबकुछ
जो ज़रूरी है
और जो सीखा जा सकता है
ताकि जान लें सभी
यह दृढ़ता तर्कसंगत है,
कि हमारी ‘उम्मीद
महज एक भावना नहीं है’।