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महाविद्रोही राहुल सांकृत्यायन की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके विचारों का प्रचार अभियान

धार्मिक कट्टरता, जातिभेद की संस्कृति और हर तरह की दिमाग़ी गुलामी के ख़िलाफ़ राहुल के आह्वान पर अमल हमारे समाज की आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है। पूँजी की जो चौतरफ़ा जकड़बन्दी आज हमारा दम घोंट रही है, उसे तोड़ने के लिए ज़रूरी है कि तमाम परेशान-बदहाल मेहनतकश आम लोग एकजुट हों और यह तभी हो सकता है जब वे धार्मिक रूढ़ियों और जात-पाँत के भेदभाव से अपने को मुक्त कर लें।

क्यों संघर्षरत हैं हम एफ़.टी.आई.आई. के लिए?

एफटीआईआई के छात्र विकास उर्स ने कहा कि इस हड़ताल ने उनके विश्व दृष्टिकोण को विस्तारित किया है, यह हड़ताल एफटीआईआई के छात्रों के लिए एक सीखने का तर्जुबा रहा है जिसके ज़रिये उन्हें अपनी कक्षाओं से भी कही ज्यादा ज्ञान मिला। विकास ने आगे कहा कि एफटीआईआई एक अकेला ऐसा कला और शिक्षा का संस्थान नहीं है जहाँ सरकार अपने राजनीतिक हित को साधने के लिए भगवाकरण की नीति लागू कर रही है। अम्बेडकर-पेरियार स्टडी सर्किल से लेकर, सी.बी.एफ.सी, सी.एफ.एस.आई आदि भी इस सरकार के निशाने पर रह चुके हैं। विकास ने बताया कि किस तरह उनके संघर्ष को कुचलने के लिए उनके ख़िलाफ़ फर्जी एफआईआर दर्ज़ करवाई जा रही है और छात्रों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह अपनी हड़ताल खत्म कर दें। एफटीआईआई की साक्षी गुलाटी ने कहा कि हमारा संघर्ष इस देश के बाकी शिक्षा संस्थानों और कला के केन्द्रों पर हो रहे भगवाकरण के हमलों से कटा हुआ नहीं है बल्कि यह संघर्ष भी उसी बड़ी लड़ाई का हिस्सा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज में एक शोध छात्रा के साथ हुए यौन शोषण के खिलाफ़ विरोध-प्रदर्शन

ग़ौरतलब है कि सेण्ट स्टीफेंस कॉलेज के प्रिंसिपल थम्पू तमाम तरीकों से आरोपी को बचा रहे हैं। कॉलेज के तमाम तथाकथित प्रगतिशील लोग भी मसले पर चुप्पी साधे बैठे हैं। कुछ ने तो पीड़ित छात्र के ही चरित्र को प्रश्नों के दायरे में लाने का प्रयास किया है। ऐसे स्त्री-विरोधी कदमों को छात्रों को एकजुट होकर विरोध करना चाहिए। दिशा छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने पूछा कि “स्त्री सुरक्षा” के नाम पर कॉलेज प्रशासन व कुछ शिक्षक गण हॉस्टलों में छात्राओं पर तरह-तरह की पाबन्दियाँ लगाते हैं। रात में आने का वक़्त आठ बजे कर दिया जाता है, नाइट आउट व लेट नाइट की आज्ञा देने पर रोक लगा दी जाती है। लेकिन वास्तव में तो प्रशासन और कॉलेज के भीतर ही छात्रओं का यौन-उत्पीड़न हो रहा है। यह दिखाता है कि स्त्री सुरक्षा के नाम पर छात्राओं पर तरह-तरह की रोक लगायी जाती है, जबकि उनका उत्पीड़न कॉलेजों, विभागों आदि की भीतर ही किया जाता है। छात्रों-छात्राओं को मिलकर विश्वविद्यालय में इस माहौल के ख़िलाफ़ एक लम्बा संघर्ष छेड़ना होगा।

दिल्ली विश्वविद्यालय में 2014-15 के अकादमिक सत्र से सीबीसीएस लागू होने के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन

इसके अंतर्गत किया यह जा रहा है की सभी कॉलेजों को समान संस्तर पर लाने का जुमला उछाल कर उनका पूरा स्तर गिराया जायेगा ताकि विदेशी प्राइवेट विश्वविद्यालयों का धंधा चल सके। यह फैसला भी प्रशासन ने छात्रों-शिक्षकों से बिना सलाह मशविरा लिए लागू कर दिया। शिक्षा को पूरी तरह एक बिकाऊ माल में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है और आम मेहनतकश जनता की पहुँच से शिक्षा को दूर ले जाया जा रहा है। इन्हीं छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ दिशा छात्र संगठन अन्य शिक्षक व छात्र संगठनो के साथ एक संयुक्त मोर्चे के तहत संघर्षरत है। जहाँ लगातार इन छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ आवाज़ उठायी जा रही है जिसमें 4 जून को अभी यूजीसी पर विरोध प्रदर्शन किया गया जहाँ यह माँग की गई कि सीबीसीएस को वापस लिया जाये। 9 जून को जन्तर-मन्तर पर विरोध प्रदर्शन किया गया- उसके साथ ही छात्रों व आम नागरिकों के बीच इसके ख़िलाफ प्रचार अभियान चलाया गया व हस्ताक्षर जुटाया गया। एक अभियान की शक्ल में 5 से 25 जून तक विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद नवागंतुक छात्रों के बीच इन छात्र-विरोधी नीतियों का पर्दाफाश किया गया।

दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्पर्स यूनियन के जुझारू संघर्ष ने झुकाया केजरीवाल सरकार को

वहीं दूसरी ओर हड़तालकर्मियों को परेशान करने और आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए सरकार सुपरवाइज़रों और सीडीपीओ से लगातार दबाव बनवा रही थी कि अगर हड़ताल में शामिल होंगे तो नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, अलग-अलग केन्द्रों पर पुलिस की धमकियों से लेकर तमाम तरह से दबाव कर्मचारियों पर बनाए जा रहे थे। हड़ताल स्थल पर शौचालय की व्यवस्था न करवाना, पानी के टैंकर को हटवा देने, तबियत बिगड़ने पर डॉक्टरी सहायता न पहुँचाने और पुलिस को भेज हड़तालकर्मियों के तम्बू को उखड़वाने जैसी तमाम कोशिशों के बावजूद न तो दलाल और न ही सरकार आँगनवाड़ी के संघर्ष को तोड़ पाये। आँगनवाड़ी कर्मचारियों ने अपनी परेशानियों को दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के सामने भी रखा मगर नजीब जंग ने आँगनवाड़ी कर्मचारियों को सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव से जाकर मिलने की सलाह दी। 7 दिन लम्बी चली अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और जनता द्वारा पैदा किये गए दबाव के कारण केजरीवाल सरकार को आँगनवाड़ी कर्मचारियों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा।

हम हार नहीं मानेंगे! हम लड़ना नहीं छोड़ेंगे!

शासक हमेशा ही यह मानने की ग़लती करते रहे हैं कि संघर्षरत स्त्रियों, मज़दूरों और छात्रों-युवाओं को बर्बरता का शिकार बनाकर वे विरोध की आवाज़ों को चुप करा देंगे। वे बार-बार ऐसी ग़लती करते हैं। यहां भी उन्होंने वही ग़लती दोहरायी है। 25 मार्च की पुलिस बर्बरता केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली के मेहनतकश ग़रीबों को एक सन्देश देने की कोशिश थी और सन्देश यही था कि अगर दिल्ली के ग़रीबों के साथ केजरीवाल सरकार के विश्वासघात के विरुद्ध तुमने आवाज़ उठायी तो तुमसे ऐसे ही क्रूरता के साथ निपटा जायेगा। हमारे घाव अभी ताजा हैं, हममें से कई की टांगें सूजी हैं, उंगलियां टूटी हैं, सिर फटे हुए हैं और शरीर की हर हरकत में हमें दर्द महसूस होता है। लेकिन, इस अन्याय के विरुद्ध लड़ने और अरविंद केजरीवाल और उसकी ‘आप’ पार्टी की घृणित धोखाधड़ी का पर्दाफाश करने का हमारा संकल्प और भी मज़बूत हो गया है।

25 मार्च की घटना के विरोध में देश के अलग-अलग हिस्सों में आम आदमी पार्टी के विरोध में प्रदर्शन

25 मार्च की घटना के विरोध दिल्ली, पटना, मुम्बई और लखनऊ में विरोध प्रदर्शन हुए। 1 अप्रैल को दिल्ली के वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र के मज़दूरों ने ‘दिल्ली इस्पात उद्योग मज़दूर यूनियन’ के नेतृत्व में सैंकड़ों की संख्या में मज़दूरों ने रैली निकाली और इलाके के आप विधायक राजेश गुप्ता का घेराव किया। राजेश गुप्ता मज़दूरों की रैली के पहुँचने के पहले ही पलायन कर गये। इसके बाद मज़दूरों ने उनके कार्यालय के बाहर पुतला दहन किया और फिर वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में आम आदमी पार्टी के पूर्ण बहिष्कार का एलान किया।

एसओएल के छात्रों का दिल्ली सचिवालय पर प्रदर्शन

एस ओ एल यानी कि स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग दिल्ली विश्वविद्यालय का पत्राचार शिक्षा विभाग है जिसमें लगभग साढे चार लाख छात्रों की बड़ी आबादी पढती है। इन छात्रों को अपनी शिक्षा सम्बन्धी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, मसलन कक्षाओं की कमी, लाइब्रेरी का न होना, कक्षाएं कम लगने की वजह से समय पर सिलेबस पूरा न होना और परीक्षा परिणाम का देर से घोषित किया जाना जिस कारण से एमए में दाख़िला न हो पाना; ये तमाम समस्याएँ हैं जिनसे छात्र जूझते रहते हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन इस पर कोई कार्यवाई नहीं कर रहा है। छात्रों की समस्याओं के बारे में दिल्ली विश्वविद्यालय गंभीर नहीं है क्योंकि आम घरों से आने वाले इन छात्रों को विश्वविद्यालय छात्र मानता ही नहीं है।

दिल्ली सचिवालय पर अपनी माँगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे मेट्रो के ठेका मज़दूरों पर लाठी चार्ज

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के ठेका मज़दूरों ने 3 मार्च को अपनी माँगों को लेकर दिल्ली सचिवालय पर बड़ी संख्या में प्रदर्शन किया परन्तु केजरीवाल सरकार ने मज़दूरों से मिलना तो दूर उल्टा उन पर लाठीचार्ज करवा दिया जिसके विरोध में मज़दूरों ने केजरीवाल का पुतला फूँका जबकि पहले मज़दूर वहाँ डीएमआरसी में व्याप्त भ्रष्टाचार का पुतला फूंकना चाहते थे। लाठीचार्ज के बावजूद जब मज़दूर डटे रहे तब जाकर श्रम मन्त्री के निजी सचिव ने मज़दूरों के प्रतिनिधि मण्डल ने मुलाकात की। डीएमआरसी में काम करने वाले टॉम (टिकट ऑपरेटिंग मशीन) ऑपरेटर, हाउसकीपर व सिक्योरिटी गार्ड नियमित प्रकृति का कार्य करने के बावजूद ठेके पर रखे जाते हैं। दिल्ली की शान मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो इन ठेका कर्मचारियों को अपना कर्मचारी न मानकर ठेका कम्पनियों यथा, जेएमडी, ट्रिग, एटूज़ेड, बेदी एण्ड बेदी, एनसीईएस आदि का कर्मचारी बताती है, जबकि भारत का श्रम क़ानून स्पष्ट तौर पर कहता है कि प्रधान नियोक्ता स्वयं डीएमआरसी है। ठेका कम्पनियाँ भर्ती के समय सिक्योरिटी राशि के नाम पर वर्कर्स से 20-30 हज़ार रुपये वसूलती हैं और ‘रिकॉल’ के नाम पर मनमाने तरीक़े से उन्हें काम से निकाल दिया जाता है। ज़्यादातर वर्कर्स को न्यूनतम मज़़दूरी, ई,सआई, पीएफ़ की सुविधाएँ नहीं मिलती हैं।

भगतिसंह, सुखदेव एवं राजगुरू के 84 वें शहादत दिवस के अवसर नोएडा, दिल्‍ली व नरवाना में कार्यक्रम

नोएडा के सेक्टर 63 स्थित छिजारसी में 21 से 23 मार्च तक शहीद मेला आयोजित किया गया। मेले के तीसरे व अंतिम दिन क्रांतिकारी गीतों एवं कविता पाठ तथा फि़ल्मों के अलावा पंजाब की तर्कशील सोसाइटी के साथियों ने अंधवि‍श्वास-तोड़क जादू के खेल दिखाये और पाखंडी बाबाओं, साधू-संतों के चंगुल से निकलने की अपील की तथा वैज्ञानिक व तर्कशील सोच को बढावा देने की जरूरत पर बल दिया। भगतिसंह, सुखदेव एवं राजगुरू के 84 वें शहादत दिवस के अवसर पर शहीद मेले से एक मशाल जुलूस भी निकाला गया जिसमें ‘भगतिसंह तुम जिन्दा हो हम सबके संकल्पों में’, ‘अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम’ जैसे गगनभेदी नारे लगाकर शहीदों के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया।