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एंगेल्‍स की प्रसिद्ध पुस्तिका ‘समाजवाद: काल्‍पनिक तथा वैज्ञानिक’ का परिचय

समाजवाद की वैज्ञानिक धारा से अपरिचित लोग समाजवाद को एक अव्‍यवहारिक और आदर्शवादी विचार मानते हैं। ऐसे लोग अक्‍सर यह कहते हुए पाये जाते हैं कि समाजवाद जिस तरह की व्‍यवस्‍था की बात करता है वह कल्‍पना जगत में तो बहुत अच्‍छी लगती है, परन्‍तु वास्‍तविक जगत में ऐसी व्‍यवस्‍था संभव नहीं है क्‍योंकि मनुष्‍य अपने स्‍वभाव से ही लालची और स्‍वार्थी होता है। ऐसे लोगों को यह नहीं पता होता कि समाजवाद की उनकी समझ दरअसल काल्‍पनिक समाजवाद (Utopian Socialism) की धारा द्वारा प्रतिपादित विचारों के प्रभाव में आकर बनी है जिसके अनगिनत संस्‍करण दुनिया के विभिन्‍न हिस्‍सों में पाये जाते हैं। ऐसे लोग इस बात से भी अनभिज्ञ होते हैं कि काल्‍पनिक समाजवाद की इस धारा के बरक्‍स मार्क्‍स और एंगेल्‍स द्वारा प्रतिपादित वैज्ञानिक समाजवाद की भी एक धारा है जो दरअसल काल्‍पनिक समाजवाद की धारा के साथ आलोचनात्‍मक संबन्‍ध रखते हुए और उसे कल्‍पना की दुनिया से वास्‍तविक और व्‍यवहारिक दुनिया में लाने की प्रक्रिया में विकसित हुई है। काल्‍पनिक समाजवाद से वैज्ञानिक समाजवाद की इस विकासयात्रा को समझने के लिए शायद सबसे बेहतर रचना एंगेल्‍स की प्रसिद्ध पुस्तिका ‘समाजवाद: काल्‍पनिक तथा वैज्ञानिक’है। ब्रिटेन के प्रसिद्ध मार्क्‍सवादी मॉरिस काॅर्नफ़ोर्थ ने इस पुस्तिका के बारे में लिखा है: ”मार्क्‍स और एंगेल्‍स की सभी कृतियों में से, शुरुआती पाठक के लिए यह शायद सर्वश्रेष्‍ठ है। यह बेहद स्‍पष्‍ट और सरल शैली में लिखी गयी है और वैज्ञानिक समाजवाद के बुनियादी विचारों से पाठक को परि‍चित कराती है।”

उद्धरण

केवल उन किताबों को प्यार करो जो ज्ञान का स्रोत हों, क्योंकि सिर्फ़ ज्ञान ही वन्दनीय होता है; ज्ञान ही तुम्हें आत्मिक रूप से मज़बूत, ईमानदार और बुद्धिमान, मनुष्य से सच्चा प्रेम करने लायक, मानवीय श्रम के प्रति आदरभाव सिखाने वाला और मनुष्य के अथक एवं कठोर परिश्रम से बनी भव्य कृतियों को सराहने लायक बना सकता है।