Category Archives: मज़दूर आन्‍दोलन

दिल्ली आंगनवाड़ी की महिलाओं की हड़ताल जारी है !

केन्द्र में भाजपा की फासीवादी मोदी सरकार तो खुल्ले तौर पर मजदूरों की विरोधी है ही लेकिन दिल्ली का ये नटवरलाल जो कि छोटे बनिये-व्यापारी का प्रतिनिधित्व करता है किसी भी मायने में मोदी से कम नहीं है! जिन तथाकथित ‘लिबरल जन’ का भरोसा इस नटवरलाल पर है और जो इसे मोदी का विकल्प समझ रहे हैं उन्हें भी अब अपनी आँखे खोल लेनी चाहिए। सरकार और दलाल यूनियनों के सारे कोशिशों के बाबजूद आंगनवाड़ी की महिलाएँ अपनी यूनियन ‘दिल्ली स्टेट आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स यूनियन’ के नेतृत्व में शानदार तरीके से अपने हड़ताल को चला रही है और अपने एकता के दम पर जरुर दिल्ली सरकार को झुकाएँगी!

एमसीडी चुनावों में क्रान्तिकारी मज़दूर मोर्चा की भागीदारी : एक राजनीतिक समीक्षा व समाहार

चुनाव में रणकौशलात्मक भागीदारी का अनुभव बेहद सीखने वाला और प्रबोधनकारी रहा। नतीजों पर हम आगे आयेंगे, लेकिन क्रान्तिकारी मज़दूर मोर्चा ने काफी कुछ काम वोटिंग के दिन से पहले ही कर लिया था। चुनाव प्रचार के दौरान जो अनुभव रहा वह बेहद अहम है। इस प्रचार के दौरान यह पाया गया कि जो लोग पहले सामान्य दौर में किये जाने वाले आम राजनीतिक प्रचार या फिर चुनावों के दौरान किये जाने वाले भण्डाफोड़ प्रचार के दौरान ध्यान नहीं देते थे, वे भी चुनाव प्रचार के दौरान क्रान्तिकारी मज़दूर मोर्चा के क्रान्तिकारी प्रचार पर ध्यान दे रहे थे।

दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्पर्स यूनियन के जुझारू संघर्ष ने झुकाया केजरीवाल सरकार को

वहीं दूसरी ओर हड़तालकर्मियों को परेशान करने और आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए सरकार सुपरवाइज़रों और सीडीपीओ से लगातार दबाव बनवा रही थी कि अगर हड़ताल में शामिल होंगे तो नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, अलग-अलग केन्द्रों पर पुलिस की धमकियों से लेकर तमाम तरह से दबाव कर्मचारियों पर बनाए जा रहे थे। हड़ताल स्थल पर शौचालय की व्यवस्था न करवाना, पानी के टैंकर को हटवा देने, तबियत बिगड़ने पर डॉक्टरी सहायता न पहुँचाने और पुलिस को भेज हड़तालकर्मियों के तम्बू को उखड़वाने जैसी तमाम कोशिशों के बावजूद न तो दलाल और न ही सरकार आँगनवाड़ी के संघर्ष को तोड़ पाये। आँगनवाड़ी कर्मचारियों ने अपनी परेशानियों को दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के सामने भी रखा मगर नजीब जंग ने आँगनवाड़ी कर्मचारियों को सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव से जाकर मिलने की सलाह दी। 7 दिन लम्बी चली अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और जनता द्वारा पैदा किये गए दबाव के कारण केजरीवाल सरकार को आँगनवाड़ी कर्मचारियों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा।

हम हार नहीं मानेंगे! हम लड़ना नहीं छोड़ेंगे!

शासक हमेशा ही यह मानने की ग़लती करते रहे हैं कि संघर्षरत स्त्रियों, मज़दूरों और छात्रों-युवाओं को बर्बरता का शिकार बनाकर वे विरोध की आवाज़ों को चुप करा देंगे। वे बार-बार ऐसी ग़लती करते हैं। यहां भी उन्होंने वही ग़लती दोहरायी है। 25 मार्च की पुलिस बर्बरता केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली के मेहनतकश ग़रीबों को एक सन्देश देने की कोशिश थी और सन्देश यही था कि अगर दिल्ली के ग़रीबों के साथ केजरीवाल सरकार के विश्वासघात के विरुद्ध तुमने आवाज़ उठायी तो तुमसे ऐसे ही क्रूरता के साथ निपटा जायेगा। हमारे घाव अभी ताजा हैं, हममें से कई की टांगें सूजी हैं, उंगलियां टूटी हैं, सिर फटे हुए हैं और शरीर की हर हरकत में हमें दर्द महसूस होता है। लेकिन, इस अन्याय के विरुद्ध लड़ने और अरविंद केजरीवाल और उसकी ‘आप’ पार्टी की घृणित धोखाधड़ी का पर्दाफाश करने का हमारा संकल्प और भी मज़बूत हो गया है।

लुधियाना बलात्कार व क़त्ल काण्ड की पीड़िता और बहादुरी से बलात्कारियों-कातिलों के ख़िलाफ़ जूझने वाली शहनाज़़ को इंसाफ़ दिलाने के लिए विशाल लामबन्दी और जुझारू संघर्ष

इस संघर्ष के दौरान विभिन्न चुनावी पार्टियों के दलाल नेताओं सहित संघर्ष में तोड़फ़ोड़ करने की कोशिश करने वाली कई रंगों की ताक़तों की जनविरोधी साजिशों को नाकाम करने में कामयाबी मिली है। एकजुट संघर्ष की यह प्राप्तियाँ बताती हैं कि जनता जब एकजुट होकर इमानदार, जुझारू और समझदार नेतृत्व में योजनाबद्ध ढंग से लड़ती है तो बड़े से बड़े जन-शत्रुओं को धूल चटा सकते हैं। लोगों को शहनाज़़ के बलात्कार व क़त्ल के दोषियों को सजा करवाने के लिए तो जुझारू एकता कायम रखनी ही होगी बल्कि स्त्रियों सहित तमाम जनता पर कायम गुण्डा राज से रक्षा और मुक्ति की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए एकता को और विशाल व मज़बूत बनाना होगा।

25 मार्च की घटना के विरोध में देश के अलग-अलग हिस्सों में आम आदमी पार्टी के विरोध में प्रदर्शन

25 मार्च की घटना के विरोध दिल्ली, पटना, मुम्बई और लखनऊ में विरोध प्रदर्शन हुए। 1 अप्रैल को दिल्ली के वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र के मज़दूरों ने ‘दिल्ली इस्पात उद्योग मज़दूर यूनियन’ के नेतृत्व में सैंकड़ों की संख्या में मज़दूरों ने रैली निकाली और इलाके के आप विधायक राजेश गुप्ता का घेराव किया। राजेश गुप्ता मज़दूरों की रैली के पहुँचने के पहले ही पलायन कर गये। इसके बाद मज़दूरों ने उनके कार्यालय के बाहर पुतला दहन किया और फिर वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में आम आदमी पार्टी के पूर्ण बहिष्कार का एलान किया।

दिल्ली इस्पात उद्योग मज़दूर यूनियन के पंजीकरण के बाद वज़ीरपुर में मज़दूर हुँकार रैली

गरम रोला के मज़दूरों की हड़ताल से जन्मी यह यूनियन आज पूरी स्टील लाइन के मज़दूरों की यूनियन बन चुकी है। गरम रोला के आन्दोलन में 27 अगस्त की आम सभा में यह तय हुआ था कि ऐसी यूनियन बनानी होगी जो स्टील उद्योग के सभी तरह के काम करने वाले मज़दूरों का प्रतिनिधित्व करे। दिल्ली इस्पात उद्योग मज़दूर यूनियन ऐसी ही यूनियन के रूप में उभरकर सामने आयी। आज इसके सदस्य गरम रोला, ठण्डा रोला, तेज़ाब, तपाई, तैयारी, रिक्शा, पोलिश आदि यानी हर तरह के मज़दूर साथी हैं तथा सदस्यता संख्या में लगातार विस्तार हो रहा है।

वज़ीरपुर के गरम रोला मज़दूरों का ऐतिहासिक आन्दोलन

पूरी हड़ताल के दौरान मज़दूरों ने न सिर्फ हर दिन मालिकों, पुलिस, श्रम विभाग, गुंडों और नेताओं-मंत्रियों के चरित्र को समझा व इनके खिलाफ अपनी रणनीति बनायी बल्कि हड़ताल के मंच का प्रयोग मज़दूर वर्ग को संघर्षों के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के लिए भी किया गया। पेरिस कम्यून की कहानी, अक्टूबर क्रान्ति, स्त्री मज़दूरों की भूमिका से लेकर छत्तीसगढ़ के मज़दूर आन्दोलन व ट्रेड यूनियन के जनवादी तरीकों पर समय-समय पर बिगुल मज़दूर दस्ता, नौजवान भारत सभा, स्त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने बात रखी। हड़ताल के प्रत्येक दिन मंच का संचालन कर रहे बाबूराम व सनी ने गरम रोला मज़दूर एकता समिति के सदस्यों व बिगुल मज़दूर दस्ता के सदस्यों को आन्दोलन व मज़दूर वर्ग के इतिहास पर बात रखने के लिए आमंत्रित किया।

वज़ीरपुर गरम रोला मज़दूर आन्दोलन में ‘इंक़लाबी मज़दूर केन्द्र’ की घृणित ग़द्दारी और गरम रोला मज़दूरों का माकूल जवाब

दरअसल इंमके के लोगों की यह ग़ैर-मार्क्सवादी सोच भी इनकी अपनी नहीं है, बल्कि इन्होंने इसे पश्चिम बंगाल के एक संगठन से चोरी किया है जो कि पार्टी से इतर मज़दूर वर्ग के एक राजनीतिक केन्द्र की बात करते हैं। इंमके की राजनीतिक नैतिकता का अन्दाज़ा इन्हीं बातों से चलता है। इनकी पूरी राजनीति ही अब तक विजातीय रुझानों से टुकड़ों-टुकड़ों में लाइन चोरी करके चलती रही है। तमाम प्रश्नों पर इंमके लगातार अपनी अवस्थिति इसी प्रकार बदलता रहा है, विचारों को बिना सन्दर्भ बताये चोरी करता रहा है और मौलिक तौर पर अगर इसने कुछ किया है तो वह अर्थवाद, ट्रेडयूनियनवाद, संघाधिपत्यवाद, अवसरवाद और कुत्साप्रचार की राजनीति है।

हरियाणा के नरवाना में निर्माण मज़दूरों ने संघर्ष के दम पर हासिल की जीत

अभी पिछले अप्रैल माह की 15 तारीख़ को भवन निर्माण क्षेत्र से जुड़े कुछ मज़दूरों ने अपनी मज़दूरी बढ़वाने के लिए नौजवान भारत सभा और बिगुल मज़दूर दस्ता से जुड़े कार्यकत्ताओं से सलाह-मशविरा किया। इन मज़दूरों का काम ट्राली-ट्रक इत्यादि से सीमेण्ट, बजरी, रेती आदि उतारने और लादने का होता है। मज़दूरी बेहद कम और पीस रेट के हिसाब से मिलती है। ज्ञात हो कि नौजवान भारत सभा और बिगुल मज़दूर दस्ता पिछले लगभग दो साल से हरियाणा में सक्रिय हैं। युवाओं से जुड़े तथा विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर प्रचार आदि के कारण और पिछले दिनों चले मारुति सुजुकी मज़दूर आन्दोलन में भागीदारी के कारण इन संगठनों की इलाक़े में पहचान है। बिगुल और नौभास के कार्यकर्ताओं ने निर्माण क्षेत्र से जुड़े मज़दूरों की तुरन्त यूनियन बनाने और यूनियन के तहत ही संगठित रूप से हड़ताल करने का सुझाव दिया। 15 तारीख़ को ही निर्माण मज़दूर यूनियन की तरफ़ से पर्चा लिखकर छपवा दिया गया और सभी मज़दूरों को एकजुट करके हड़ताल करने का निर्णय लिया गया। उसी दिन यूनियन की 11 सदस्यीय कार्यकारी कमेटी का चुनाव भी कर लिया गया। पहले दिन काम बन्द करवाने को लेकर कई मालिकों के साथ कहा-सुनी और झगड़ा भी हुआ, किन्तु अपनी एकजुटता के बल पर यूनियन ने हर जगह काम बन्द करवा दिया। 16 तारीख़ को यूनियन ने नौभास और बिगुल मज़दूर दस्ता की मदद से पूरे शहर में परचा वितरण और हड़ताल का प्रचार किया। मज़दूरों के संघर्ष और जुझारू एकजुटता के सामने 16 तारीख़ के ही दिन में मालिकों यानी भवन निर्माण से जुड़ी सामग्री बेचने वाले दुकानदारों ने हाथ खड़े कर दिये।